
सारंगढ़ के भारत माता चौक का मामला, बची हुई प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने और उचित व्यवस्था बनाने की मांग..

सारंगढ़। नगर के भारत माता चौक के पास देवी-देवताओं की प्रतिमाएं कचरे के ढेर के नजदीक रखे होने का मामला सामने आया है। प्रतिमाओं की इस स्थिति को लेकर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान का सवाल उठने लगा है। स्थानीय स्तर पर जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि मामले का निरीक्षण कराकर प्रतिमाओं को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप उनके सम्मानपूर्वक हटाने की व्यवस्था की जाए।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नगर में दुर्गा उत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। विभिन्न स्थानों पर पूजा-पंडाल सजे हैं और लोग माता दुर्गा की आराधना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में धार्मिक प्रतिमाओं का कचरे के पास रखा होना लोगों का ध्यान खींच रहा है। हालांकि, प्रतिमाओं को वहां किसने रखा और इसके पीछे क्या परिस्थितियां थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
दो महीने पहले बनाई गई थी प्रतिमाएं..
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब दो महीने पहले भारत माता चौक के पास कोलकाता से आए कारीगरों ने भगवान श्रीगणेश और माता दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण किया था। गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमाओं की बिक्री हुई, जबकि इसके बाद दुर्गा उत्सव की तैयारियां शुरू होने पर माता दुर्गा की प्रतिमाएं भी बेची गईं।
बताया जा रहा है कि बिक्री के बाद बची कुछ प्रतिमाएं अब चौक के पास कचरे के ढेर के नजदीक रखी दिखाई दे रही हैं। इन प्रतिमाओं को किस उद्देश्य से वहां रखा गया और क्या इनके सुरक्षित रखने या सम्मानपूर्वक हटाने की कोई व्यवस्था की गई थी, यह स्पष्ट नही है। ऐसे में संबंधित निकाय के लिए मौके की स्थिति की जांच करना जरूरी है।
आस्था के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी..
धार्मिक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के लिए केवल सजावटी वस्तु नही, बल्कि आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक होती हैं। यही कारण है कि पूजा-पर्व समाप्त होने के बाद भी इनका सम्मान बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रतिमाओं का निर्माण और बिक्री करने वाले लोगों के साथ-साथ संबंधित आयोजकों और स्थानीय निकाय की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि बची हुई प्रतिमाओं को खुले में असुरक्षित ढंग से न छोड़ा जाए। उनके सुरक्षित रखने, पुनः उपयोग या धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप सम्मानपूर्वक हटाने की व्यवस्था के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
हालांकि, केवल प्रतिमाओं के कचरे के पास रखे होने के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था की मंशा पर सवाल उठाना उचित नही होगा। पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि प्रतिमाएं वहां कैसे पहुंची और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी।
प्रशासन और नगर पालिका से हस्तक्षेप की मांग..
मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर भारत माता चौक की स्थिति का निरीक्षण कराने की मांग की गई है। मांग है कि नगर पालिका परिषद के माध्यम से प्रतिमाओं को सुरक्षित स्थान पर रखवाया जाए और संबंधित लोगों से जानकारी लेकर आगे की उचित कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही, प्रतिमाओं का सम्मानपूर्वक हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई जा रही है। इससे त्योहारों के बाद बची प्रतिमाओं को लेकर भविष्य में ऐसी स्थिति बनने से रोका जा सकेगा।
त्यौहारों के बाद बची प्रतिमाओं के लिए बने स्थायी व्यवस्था..
यह मामला केवल भारत माता चौक तक सीमित न रहकर नगर में धार्मिक प्रतिमाओं के प्रबंधन से जुड़ा विषय भी है। गणेशोत्सव और दुर्गा उत्सव जैसे पर्वों के दौरान बड़ी संख्या में प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। बिक्री के बाद बची प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने के लिए पहले से व्यवस्था हो, तो ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है।
नगर पालिका संबंधित कारीगरों और प्रतिमा विक्रेताओं के साथ समन्वय कर सुरक्षित रखने वाले स्थल निर्धारित करने, प्रतिमाओं के पुनः उपयोग की संभावनाएं तलाशने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप सम्मानपूर्वक हटाने की व्यवस्था के विकल्प तय करने पर विचार कर सकते है।
फिलहाल, भारत माता चौक के पास प्रतिमाओं के रखे होने की परिस्थितियों और जिम्मेदार पक्षों के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रतिमाओं की गरिमा बनाए रखना और भविष्य के लिए उचित व्यवस्था करना इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू है।







