मदकूद्वीप में पर्यटन विकास को मिलेगी नई उड़ान, इको-टूरिज्म सेंटर की घोषणा.. देखें वीडियो..

मुख्यमंत्री साय ने उद्यान का किया अनावरण, स्व. शांताराम सराफ की स्मृति में हुआ नामकरण; ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत लगाया कल्पवृक्ष..

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्राकृतिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक स्थलों में शामिल मदकूद्वीप को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। मदकूद्वीप स्थित श्री हरिहर क्षेत्र केदार में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित उद्यान का मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अनावरण किया। इस उद्यान का नामकरण स्वर्गीय शांताराम सराफ की स्मृति में किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मदकूद्वीप में इको-पर्यटन विकास केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की।

इको-पर्यटन केंद्र विकसित होने से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही मदकूद्वीप की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी नई दिशा मिल सकती है। सरकार की ओर से क्षेत्र के विकास में प्रकृति संरक्षण और पर्यटन को साथ लेकर आगे बढ़ने की बात कही गई।

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कल्पवृक्ष का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश..

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कल्पवृक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे प्रकृति और मानव जीवन का आधार हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान मां के प्रति प्रेम और कृतज्ञता की भावना को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने वाली पहल है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण आज की जरूरत के साथ आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी भी है।

प्रकृति और विरासत दोनों के संरक्षण पर जोर..

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मदकूद्वीप जैसे स्थलों का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र प्राकृतिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे स्थानों का संरक्षण सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के प्रयास एक साथ आगे बढ़ेंगे, तभी प्रदेश की समृद्ध विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और जनभागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास के साथ उनके प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

बड़े स्तर पर जुटे जनप्रतिनिधि और नागरिक..

कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, मंत्री दयाल दास बघेल, लखन लाल देवांगन, विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, सुशांत शुक्ला और पुन्नू लाल मोहले सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वन विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

मदकूद्वीप को केवल धार्मिक-पुरातात्विक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति, विरासत और रोजगार से जुड़े इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में यह घोषणा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।