नालों पर करोड़ों खर्च, फिर भी सड़कों पर समंदर; घरों में घुसा पानी, जनता पूछ रही – जिम्मेदार कौन?

बिलासपुर। आसमान से बरसी बारिश ने जितना पानी शहर में नहीं भरा, उससे ज्यादा सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर खड़े कर दिए हैं। गुरुवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक हुई तेज बारिश ने पूरे बिलासपुर को जलमग्न कर दिया। सड़कें नदियों में बदल गईं, कॉलोनियां तालाब बन गईं और लोगों के घरों में पानी घुस गया। शहर के हालात देखकर ऐसा लग रहा था मानो किसी प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दे दी हो, जबकि वास्तविकता यह है कि यह संकट वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था और लापरवाही का परिणाम है।
नगर निगम हर वर्ष बारिश से पहले नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था के सुधार और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का दावा करता है। नगर निगम द्वारा बरसात शुरू होने से पहले निरीक्षण किए जाते हैं, सफाई अभियान चलाए जाते हैं, नालो की सफाई की जाती है लेकिन जैसे ही तेज बारिश होती है, सारी तैयारियां पानी में बह जाती हैं। इस बार भी कुछ घंटों की बारिश ने उन दावों की परतें उधेड़ कर रख दीं।
शहर का बड़ा हिस्सा बना जलाशय.. देखें वीडियो..
अरपा पार सरकंडा क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। अशोक नगर, जोरा पारा, वसंत विहार, नूतन कॉलोनी, आधा सरकंडा और आसपास के कई इलाकों में घरों के भीतर तक पानी पहुंच गया। लोगों का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और जरूरी घरेलू सामग्री पानी में डूब गई। कई परिवार पूरी रात पानी निकालने में जुटे रहे।दूसरी ओर पुराना बस स्टैंड, श्रीकांत वर्मा मार्ग, मंगला रोड, निराला नगर, कुदुदंड, तिफरा, सिरगिट्टी और शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर जलभराव के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। वाहन बीच सड़क में बंद होते रहे और लोग घंटों परेशान होते रहे।
करोड़ों के काम, लेकिन नतीजा शून्य..
सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो पहली ही तेज बारिश में शहर क्यों डूब जाता है?
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर नाला सफाई का काम केवल कागजों में पूरा दिखाया जाता है। कहीं आधी-अधूरी सफाई होती है तो कहीं निर्माण कार्य शुरू होने के बाद महीनों तक अधूरे पड़े रहते हैं। परिणाम यह होता है कि बारिश का पानी निकलने के बजाय सड़कों और घरों में भर जाता है।
ठेकेदारी व्यवस्था पर उठने लगे सवाल..
सूत्रों की मानें तो शहर में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और ठेकेदारी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नागरिकों का कहना है कि यदि नाली सफाई, नाला निर्माण और जल निकासी परियोजनाओं का सामाजिक एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

लोगों का मानना है कि केवल ठेका देने से काम पूरा नहीं हो जाता, बल्कि उसकी गुणवत्ता जाँच और निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। यदि निर्माण और सफाई कार्यों में लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
शहरवासियों का फूटा गुस्सा..
बारिश के बाद सोशल मीडिया से लेकर मोहल्लों तक एक ही चर्चा रही – आखिर कब तक बिलासपुर हर बारिश में डूबता रहेगा?


नागरिकों का कहना है कि स्मार्ट सिटी, विकास योजनाओं और करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद यदि लोगों को हर साल घरों में पानी भरने और सड़कों पर जलभराव झेलना पड़ रहा है, तो विकास के दावों पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ेंगे..
मौसम विभाग आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जता रहा है। ऐसे में शहरवासियों को डर है कि यदि जल निकासी व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

लोगों ने नगरीय प्रशासन विभाग और राज्य सरकार से मांग की है कि बारिश पूर्व किए गए कार्यों, नाला सफाई, निर्माण कार्यों और खर्च की गई राशि की स्वतंत्र जांच कराई जाए। जहां भी लापरवाही या अनियमितता मिले, वहां कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में जनता को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
फिलहाल बिलासपुर की तस्वीर यही कह रही है कि शहर बारिश से नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलताओं से डूबा है।
डिस्क्लेमर :
यह समाचार विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय नागरिकों से प्राप्त जानकारी, प्रत्यक्ष रूप से सामने आए जलभराव की स्थिति, उपलब्ध वीडियो,फोटो तथा सार्वजनिक चर्चाओं के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में व्यक्त कुछ आरोप एवं सवाल स्थानीय निवासियों और नागरिकों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक या तकनीकी जांच अभी शेष है।







