मछली पकड़ने के लिए बिछाया था मौत का करंट, मगरमच्छ की चली गई जान : रतनपुर में दो आरोपी गिरफ्तार, वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जेल..

बिलासपुर/रतनपुर। रतनपुर वन परिक्षेत्र के ग्राम पचरा में एक दर्दनाक और चिंताजनक वन्यजीव अपराध का मामला सामने आया है। तालाब में मछलियों को मारकर पकड़ने के लिए लगाए गए अवैध विद्युत करंट की चपेट में आने से एक मगरमच्छ की मौत हो गई। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग हरकत में आया और जांच के बाद दो आरोपियों के खिलाफ वन अपराध दर्ज करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

वन विभाग के अनुसार आरोपियों ने तालाब में मछलियों का शिकार करने के उद्देश्य से बिजली का करंट प्रवाहित किया था। इसी दौरान पानी में मौजूद मगरमच्छ भी करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना ने क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और अवैध शिकार की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, आरोपी पहुंचे सलाखों के पीछे..

मगरमच्छ की मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जलाशय में अवैध रूप से विद्युत प्रवाह छोड़ा गया था। साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों की पहचान कर उनके विरुद्ध वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। बाद में दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

संरक्षित वन्यजीव की मौत को गंभीरता से लिया गया..

वन अधिकारियों ने बताया कि मगरमच्छ पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण और संरक्षित वन्यजीव है। इसकी मृत्यु केवल एक वन्यजीव की मौत नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन को नुकसान पहुंचाने वाली घटना है। मछली पकड़ने के लिए करंट का उपयोग स्वयं में अवैध है और इससे जलचर एवं अन्य वन्यजीवों के जीवन पर भी खतरा उत्पन्न होता है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई..

यह पूरी कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक बिलासपुर वृत्त, वन मंडलाधिकारी बिलासपुर तथा उप वनमंडलाधिकारी बिलासपुर के मार्गदर्शन में रतनपुर परिक्षेत्र अधिकारी और वन अमले द्वारा की गई। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

ग्रामीणों से की गई अपील..

वन विभाग ने ग्रामीणों और मछुआरा समुदाय से अपील की है कि मछली पकड़ने के लिए किसी भी प्रकार के विद्युत करंट या अन्य प्रतिबंधित तरीकों का उपयोग न करें। ऐसे तरीके न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि जलाशयों में रहने वाले दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यजीवों के लिए भी घातक साबित होते हैं।

वन विभाग का मानना है कि इस कार्रवाई से वन्यजीव अपराधों में संलिप्त लोगों के बीच कड़ा संदेश जाएगा और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। ग्राम पचरा की यह घटना एक बार फिर यह बताती है कि अवैध शिकार और करंट के इस्तेमाल जैसी गतिविधियां केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रकृति और जैव विविधता के लिए भी बड़ा खतरा हैं।