‘एक माँ का बुझा इकलौता चिराग, शहर की आंखें नम’ : रुद्रप्रताप शर्मा को श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब, नाबालिग ड्राइविंग पर सख्त कानून की उठी मांग..

बिलासपुर। रुद्रप्रताप शर्मा की असामयिक मृत्यु ने जिस तरह पूरे शहर को झकझोर दिया है, उसका भावनात्मक और सामाजिक प्रभाव सोमवार को आयोजित विशाल श्रद्धांजलि रैली में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। टीम मानवता के नेतृत्व में निकाली गई श्रद्धांजलि रैली केवल एक दिवंगत युवक को अंतिम सम्मान देने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति और उससे होने वाली दुर्घटनाओं के खिलाफ समाज की सामूहिक आवाज बनकर उभरी।

शहर की सड़कों पर स्कूली बच्चों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों का जनसैलाब उमड़ा। हाथों में श्रद्धांजलि संदेश और न्याय की मांग से जुड़े पोस्टर लिए नागरिकों ने रुद्रप्रताप शर्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।

रैली में शामिल लोगों की आंखों में दर्द और आक्रोश दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। वक्ताओं ने कहा कि एक माँ का इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है और यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि एक पल की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और इस घटना ने पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर नाबालिगों के हाथों में वाहन पहुंच ही कैसे रहे हैं।

सिर्फ हादसा नहीं, सामाजिक चेतावनी है यह घटना..

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि इसे महज एक सड़क दुर्घटना मानकर भुलाया नहीं जा सकता। यह घटना समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। पिछले कुछ वर्षों में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने और उससे होने वाली दुर्घटनाओं के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। कई बार अभिभावकों की लापरवाही भी ऐसे हादसों की बड़ी वजह बनती है, जब वे अपने बच्चों को कम उम्र में ही दोपहिया या चारपहिया वाहन सौंप देते हैं।

सभा में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में और भी परिवार ऐसी त्रासदियों का सामना करने के लिए मजबूर होंगे। इसलिए केवल कानून का भय ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

दोषियों के साथ अभिभावकों की जवाबदेही तय करने की मांग..

टीम मानवता और रैली में शामिल नागरिकों ने प्रशासन एवं शासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही ऐसे मामलों में उन अभिभावकों की जिम्मेदारी भी तय की जाए जो नाबालिग बच्चों को वाहन उपलब्ध कराते हैं।

वक्ताओं ने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों पर प्रभावी रोक लगाना संभव नहीं होगा। कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और जवाबदेही की व्यवस्था भी आवश्यक है।

‘बच्चों को वाहन नहीं, संस्कार दें’ का संदेश..

श्रद्धांजलि रैली के समापन पर उपस्थित नागरिकों ने समाज से आत्ममंथन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने का भी प्रयास है। बच्चों को कम उम्र में वाहन सौंपने के बजाय उनमें अनुशासन, जिम्मेदारी और यातायात नियमों के प्रति सम्मान का भाव विकसित करना समय की मांग है।

सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि रुद्रप्रताप शर्मा को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब इस घटना से सबक लेते हुए समाज और प्रशासन मिलकर ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं।

बड़ी संख्या में नागरिक रहे उपस्थित..

श्रद्धांजलि रैली में टीम मानवता के संस्थापक राजीव चौबे सहित अभिषेक ठाकुर, अभिषेक शर्मा, अरुणिमा शर्मा, कुमार जी, गोविंद, राकेश शर्मा, विनय चौबे, हर्ष दीवान, नितिन छाबड़ा तथा विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावुक रहा और हर जुबान पर एक ही मांग सुनाई दी – रुद्रप्रताप को न्याय मिले और भविष्य में कोई परिवार ऐसी पीड़ा न झेले।