

बिलासपुर। साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत तोरवा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से साइबर ठगों के लिए बैंक खाते और पासबुक जुटाने का काम कर रहे थे। पुलिस को आशंका है कि आरोपी म्यूल अकाउंट नेटवर्क के जरिए साइबर अपराधियों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध करा रहे थे, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी की रकम के लेन-देन में किया जाता है।

गिरफ्तार आरोपियों में बापूनगर निवासी प्रियांशु वस्त्रकार (20 वर्ष) और आर.के. नगर निवासी अनिल गजभिये (36 वर्ष) शामिल हैं। दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
सूचना पर पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई..
पुलिस को सूचना मिली थी कि तितली चौक स्थित एसबीआई बैंक के आसपास एक युवक लोगों से बैंक पासबुक, खाता नंबर और अन्य बैंकिंग दस्तावेजों की जानकारी मांग रहा है तथा इसके बदले कमीशन देने का लालच दे रहा है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक रजनीश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस को देखकर संदिग्ध युवक भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसकी पहचान प्रियांशु वस्त्रकार के रूप में हुई।
मोबाइल जांच में मिले कई खातों के दस्तावेज..
आरोपी के मोबाइल फोन की जांच करने पर पुलिस को कई व्यक्तियों की बैंक पासबुक, खाता विवरण और बैंकिंग दस्तावेजों के फोटो मिले। डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी अन्य लोगों से भी बैंक खाते संबंधी जानकारी एकत्र कर रहा था।
कड़ी पूछताछ में प्रियांशु ने स्वीकार किया कि वह अनिल गजभिये के साथ मिलकर यह काम कर रहा था। इसके बाद पुलिस ने दूसरे आरोपी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की और बाद में गिरफ्तार कर लिया।
साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका..
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा एकत्रित किए जा रहे बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी में किया जा सकता था। पुलिस का मानना है कि ये खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे, ताकि ठगी की रकम इन खातों में जमा कराई जा सके और बाद में उसे विभिन्न माध्यमों से निकाला या ट्रांसफर किया जा सके।
साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। अपराधी आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करते हैं और फिर उन्हीं खातों का इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए करते हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी..
पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा इनके माध्यम से कितने बैंक खाते साइबर ठगों तक पहुंचाए गए। पुलिस को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
पुलिस की अपील..
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी न दें। थोड़े से कमीशन या लालच के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और संबंधित व्यक्ति कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन को देने की अपील की है।



