

बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (जीजीयू) में उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में उपयोग किए जाने वाले समर्थ पोर्टल से जुड़े कुछ लॉगिन आईडी और पासवर्ड सार्वजनिक होने की जानकारी सामने आई। इस घटना ने विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली, गोपनीय दस्तावेजों और हजारों छात्रों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, समर्थ पोर्टल केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, भर्ती, छात्रवृत्ति, दस्तावेज सत्यापन और प्रशासनिक कार्यों का प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म है। जीजीयू के करीब 32 विभागों का महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक डेटा इसी पोर्टल पर सुरक्षित रखा गया है।
परीक्षा प्रणाली पर मंडराया संकट..
सूत्रों के मुताबिक, पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगने की आशंका के कारण कई विभागों के प्रश्नपत्र, परीक्षा परिणाम और अन्य गोपनीय दस्तावेज जोखिम में आ गए हैं। यदि जांच में प्रश्नपत्रों तक अनधिकृत पहुंच की पुष्टि होती है, तो विश्वविद्यालय को कुछ परीक्षाएं रद्द या स्थगित करने जैसे बड़े निर्णय लेने पड़ सकते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल इस बात की पड़ताल कर रहा है कि कहीं किसी बाहरी व्यक्ति ने पोर्टल में प्रवेश कर संवेदनशील जानकारी तक पहुंच तो नहीं बनाई।
हजारों छात्रों की निजी जानकारी भी खतरे में..
समर्थ पोर्टल पर विद्यार्थियों के व्यक्तिगत और शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहते हैं। इनमें आधार और पहचान संबंधी दस्तावेज, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, अंकसूचियां, प्रवेश आवेदन, शोध संबंधी दस्तावेज तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेटा लीक की पुष्टि होती है तो यह केवल विश्वविद्यालय का आंतरिक मामला नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों की निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाएगा।
अधिकारियों की आपात बैठक, तकनीकी जांच शुरू..
मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने आपात बैठक कर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को सर्वर लॉग, लॉगिन गतिविधियों और डेटा एक्सेस रिकॉर्ड की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। साथ ही विभिन्न विभागों को अपने डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
7 दिन में सामने आएगी सच्चाई..
GGU के मीडिया प्रभारी प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि समर्थ पोर्टल से जुड़ी सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। समिति सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरक्षा चूक कितनी गंभीर है और इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ा है।
यह पूरा मामला सामने आने के बाद छात्रों, अभिभावकों और विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता का माहौल है। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे इस संभावित डेटा लीक की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



