

छत्तीसगढ़-ओडिशा की संयुक्त टीम की दबिश, महिला वन अधिकारियों की अहम भूमिका..

गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग यूनिट ने सागौन तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओडिशा में दबिश दी और एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में छत्तीसगढ़ और ओडिशा पुलिस के संयुक्त सहयोग से सफलता मिली है। खास बात यह रही कि इस ऑपरेशन में महिला रेंजर और वन रक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

मिली जानकारी के अनुसार, टाइगर रिजर्व की टीम को गोपनीय सूचना मिली थी कि ओडिशा के नबरंगपुर जिले के ग्राम फुटानाड़ा और बुड्रापारा में छत्तीसगढ़ के जंगलों से अवैध रूप से सागौन की लकड़ी काटकर फर्नीचर तैयार किया जा रहा है। इसी आधार पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन और ओडिशा के वनमंडलाधिकारी सुभेन्दु प्रसाद बेहरा के निर्देशन में संयुक्त टीम का गठन किया गया।

टीम ने सर्च वारंट लेकर फुटानाड़ा निवासी मनबोध माली और बुड्रापारा निवासी मनमथ चौधरी के घरों में छापा मारा। तलाशी के दौरान मनबोध माली के घर से सागौन से बने फर्नीचर, स्लीपर, फाड़ा सहित बढ़ईगीरी के उपकरण बरामद किए गए। जब्त लकड़ी की मात्रा लगभग 1 घन मीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 80 हजार रुपये है।

कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी मनबोध माली फरार हो गया था, जिसे 4 अप्रैल की रात उमरकोट के पास ग्राम हीरापुर से पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे छत्तीसगढ़ लाया गया। 5 अप्रैल को आरोपी से पूछताछ के बाद उसे जंगल के उस स्थान पर ले जाया गया, जहां उसने अवैध कटाई की थी।
वन विभाग ने आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और छत्तीसगढ़ व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के तहत मामला दर्ज किया है। 6 अप्रैल को उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गरियाबंद की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिनों के लिए न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
इस पूरी कार्रवाई में एसडीओ गोपाल कश्यप, भोपाल सिंह राजपूत, रेंजर सुशील सागर, दिनेश चौधरी, चंद्रबली ध्रुव, ज्योति ध्रुव सहित वन विभाग की टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महिला वन रक्षक पामेश्वरी नेताम और ललिता मरकाम ने भी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा और वन संपदा को बचाने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।



