

बिलासपुर। शहर में सनातन संस्कृति और धार्मिक जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से शुभम विहार मानस मंडली द्वारा चलाया जा रहा सतत सुंदरकांड पाठ अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में राजसदन अपार्टमेंट निवासी डॉ. आरती गायकवाड़ के घर उनके पति की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर 197वां सुंदरकांड पाठ संपन्न हुआ। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और सामूहिक रूप से सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।

मंडली के प्रेरणास्रोत श्री सत्यनारायण पांडेय ने इस अभियान की शुरुआत एक संकल्प के साथ की थी। उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की थी कि कम से कम 52 घरों में सुंदरकांड पाठ की प्रेरणा जागृत हो, ताकि यह धार्मिक परंपरा घर-घर तक पहुंचे। प्रभु कृपा से यह संकल्प अब एक बड़े अभियान का रूप ले चुका है और 197वें पाठ तक पहुंच गया है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में आधुनिक शिक्षा और पश्चिमी प्रभाव के चलते लोग अपनी पारंपरिक संस्कृति और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में इस प्रकार के आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रहे हैं। दीप प्रज्ज्वलन, भजन-कीर्तन और सामूहिक पाठ जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति की पहचान हैं, जिन्हें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
ललित अग्रवाल ने अपने संबोधन में विशेष रूप से माताओं-बहनों से अपील की कि वे बच्चों को संस्कारित बनाने के लिए उन्हें धार्मिक और नैतिक शिक्षा दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को भगवान श्रीराम, श्री हनुमान और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को आदर्श मानने की प्रेरणा दी जानी चाहिए। साथ ही, परिवार में प्रतिदिन कम से कम एक बार और सप्ताह में एक बार सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने की परंपरा विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सतत सुंदरकांड पाठ इस बात का प्रमाण है कि जब तक प्रभु श्रीराम की कृपा नहीं होती, तब तक ऐसे आयोजन लंबे समय तक निरंतर नहीं चल पाते। गायकवाड़ परिवार को यह सौभाग्य मिला कि उन्होंने अपने घर में 197वां पाठ आयोजित कर इस पुण्य कार्य में सहभागिता निभाई।
मंडली के अध्यक्ष अखिलानंद पांडेय ने बताया कि अब यह अभियान जल्द ही 200वें पाठ का आंकड़ा पार करने वाला है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिलासपुर के हर घर तक यह धार्मिक जागरण पहुंचेगा।

कार्यक्रम में ईश्वर तिवारी, आर.पी. मिश्रा, प्रमोद अवस्थी, अखिलेश द्विवेदी, विनोद अवस्थी, भूपेंद्र यादव सहित सैकड़ों श्रद्धालु और मातृशक्ति उपस्थित रहे।
सतत सुंदरकांड पाठ का यह अभियान न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में संस्कार, एकता और सांस्कृतिक चेतना का भी संचार कर रहा है। आने वाले समय में यह पहल और भी व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है।



