जमीन विवादों से घिरे अफसर की फिर बिलासपुर वापसी : पूर्व तहसीलदार नारायण गबेल अब डिप्टी कलेक्टर पद पर पदस्थ..

बिलासपुर। जिले में एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जमीन से जुड़े विवादों और एसीबी की कार्रवाई के कारण सुर्खियों में रहे तत्कालीन तहसीलदार नारायण प्रसाद गबेल का तबादला दोबारा बिलासपुर जिला मुख्यालय में डिप्टी कलेक्टर के रूप में कर दिया गया है। करीब डेढ़ साल पहले उनका स्थानांतरण किया गया था, लेकिन अब उनकी पुनः वापसी ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार उन्हें डिप्टी कलेक्टर पद पर बिलासपुर में पदस्थ किया गया है। आदेश की विशेष बात यह है कि उन्हें एकतरफा रिलीव भी कर दिया गया है, यानी वे सीधे बिलासपुर पहुंचकर कलेक्टर के निर्देशानुसार कार्यभार ग्रहण कर सकते हैं। इस फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

तहसीलदार कार्यकाल में रहे विवादों में..

नारायण गबेल अपने तहसीलदार कार्यकाल के दौरान जमीन से जुड़े मामलों को लेकर काफी चर्चित रहे। आरोप लगे कि उनके कार्यकाल में जमीनों के रिकॉर्ड और नामांतरण से जुड़े कई विवादित प्रकरण सामने आए। इन्हीं आरोपों के बीच उनके ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने छापा भी मारा था।

Anti Corruption Bureau द्वारा 24 जून 2021 को आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मामला और भी चर्चा में आया। हालांकि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही।

80 वर्षीय मंगतीन बाई का मामला फिर चर्चा में..

डिप्टी कलेक्टर पद पर उनकी वापसी के साथ ही पुराने मामले भी फिर से चर्चा में हैं। इनमें 80 वर्षीय मंगतीन बाई का मामला प्रमुख है। मंगतीन बाई ने चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 214/10, 214/5 और 214/9 की जमीन को अपने पूर्वजों की संपत्ति बताते हुए नाम दुरुस्ती की मांग की थी।

तत्कालीन तहसील प्रशासन ने साक्ष्य के अभाव में वर्ष 2015 में उनका दावा खारिज कर दिया था। इसके बाद भी वे वर्षों तक तहसील कार्यालय के चक्कर लगाती रहीं। इस दौरान उनके संबंध में पुलिस थानों को पत्र लिखे जाने और उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जाने की बात भी सामने आई थी, जिसे लेकर उस समय काफी विवाद हुआ था। मंगतीन बाई का आरोप था कि उनकी जमीन भू-माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से बेची गई।

हाई कोर्ट तक पहुंचा मामला..

आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई में देरी को लेकर शिकायतकर्ता सूरज सिंह यादव ने हाई कोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने जांच को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने और अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

इन घटनाक्रमों के चलते नारायण गबेल का नाम लंबे समय तक चर्चा में रहा। अब दोबारा बिलासपुर में उनकी पदस्थापना से एक बार फिर पुराने मामलों की याद ताजा हो गई है।

प्रशासन और जनता की नजरें..

डिप्टी कलेक्टर के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी के साथ अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे अपने कार्यकाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को किस प्रकार सुनिश्चित करते हैं। जहां एक ओर प्रशासनिक व्यवस्था इसे नियमित स्थानांतरण बता रही है, वहीं आम जनता और राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या लंबित जांच और पुराने विवादों पर कोई ठोस प्रगति होती है या फिर मामला एक बार फिर फाइलों तक सीमित रह जाता है।