

गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में अब दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल पक्षियों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं। यहां हॉर्नबिल रेस्टोरेंट तैयार किए जाएंगे। यह कोई ईंट पत्थर की इमारत नहीं बल्कि खास तरह के फलदार पेड़ों का बगीचा होगा जहां इन पक्षियों को साल भर इनका पसंदीदा भोजन मिल सकेगा। वन विभाग ने यह अनूठी पहल इनकी बढ़ती संख्या और संरक्षण को देखते हुए शुरू की है ताकि पर्यटकों को भी ये सुंदर पक्षी आसानी से नजर आ सकें।

दक्षिण भारत के मेहमानों को रास आया छत्तीसगढ़..

मालाबार पाइड हॉर्नबिल आमतौर पर दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट के घने जंगलों में पाया जाता है लेकिन उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व का माहौल इसे खूब रास आ रहा है। यहां का पहाड़ी इलाका और मौसम बिल्कुल पश्चिमी घाट जैसा है। इसी वजह से अब यहां इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। पहले जहां महीने में एकाध बार ये पक्षी दिखते थे वहीं अब हफ्ते में दो से तीन बार नजर आ जाते हैं। यह जंगल अब जैव विविधता का बड़ा केंद्र बन गया है।
पीपल और बरगद के पेड़ों पर सजेगा रेस्टोरेंट..

प्रशासन गांवों के आसपास खाली पड़ी जगहों पर पीपल और बरगद जैसे फाइकस प्रजाति के पौधे लगाएगा। इन पेड़ों में साल भर फल लगते हैं जो हॉर्नबिल का मुख्य भोजन हैं। इसी को विभाग ने हॉर्नबिल रेस्टोरेंट नाम दिया है। इससे पक्षियों को भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और पर्यटक भी इन्हें सुरक्षित दूरी से देख सकेंगे। यह पक्षी जंगल बढ़ाने में मदद करता है क्योंकि फलों को खाने के बाद ये बीजों को दूर दूर तक फैलाते हैं।
सुरक्षा के लिए बनीं विशेष ट्रैकर टीमें..


इनकी सुरक्षा के लिए हॉर्नबिल ट्रैकर टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें जंगलों में घूमकर इनके घोंसलों पर नजर रखती हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ अभिजीत शर्मा और फोटोग्राफर आकाशवीर सिंह समेत वन रक्षक राकेश मार्कंडेय,चूरामन धृतलाहरे और रेंजर अमर सिंह ठाकुर ने स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग दी है।

शिकारियों पर कार्रवाई और जंगल की आग रोकने के लिए ड्रोन के इस्तेमाल से इन पक्षियों का कुनबा सुरक्षित हुआ है। टाइगर रिजर्व में सबसे पहले साल 2017 में नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी ने इसे देखा था, जिसके बाद से इनकी आबादी लगातार फल फूल रही है।




