सम्यक आहार, सम्यक व्यायाम और सम्यक ध्यान से ही होता है ऊर्जा का निर्माण..पूज्य परम आलय जी के मार्गदर्शन से बिलासपुर में आदमी से मनुष्य बनने की यात्रा..

बिलासपुर।पूज्य परम आलय जी के 30 वर्षों के अनुभव और उनके वैज्ञानिक व व्यवहारिक सूत्रों को आत्मसात करते हुए बिलासपुर के हजारों परिवार धीरे-धीरे निरोगी जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में लोग केवल रोगमुक्त ही नहीं हो रहे, बल्कि आदमी से मनुष्य बनने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं।

इसी क्रम में शहर के विभिन्न गार्डनों में नाभि झटका प्रयोग करने वाले नियमित साधक एक साथ बी.आर. गार्डन, बृहस्पति बाजार में एकत्रित हुए और सामूहिक साधना की। इस आयोजन में बड़ी संख्या में साधकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।

पूज्य परम आलय जी को नए दृष्टिकोण वाले शिविर के माध्यम से पहली बार बिलासपुर आमंत्रित करने वाले रामावतार अग्रवाल, सुनील सुल्तानिया, राजेश गोयल (चक्कू), शिव अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, विनोद जैन, कमलेश अग्रवाल सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इन्हीं के प्रयासों से बिलासपुर में पहला शिविर संभव हो पाया, जो आने वाले समय में शहर के लिए एक मील का पत्थर सिद्ध होने जा रहा है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन की समझ..

सन टू ह्यूमन परिवार, बिलासपुर के ललित अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार लगभग 450 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी का निर्माण हुआ, 50 करोड़ वर्ष पहले पेड़-पौधे व जीव-जंतु अस्तित्व में आए और करीब 50 लाख वर्ष पहले बंदर से विकसित होकर मानव (आदमी) बना। इस विकास का सबसे बड़ा लाभ मस्तिष्क के रूप में मिला, लेकिन आज भी मनुष्य केवल 10 प्रतिशत चेतन और 90 प्रतिशत अचेतन अवस्था में जी रहा है।

मानव शरीर पंचतत्व, त्रिदोष, सप्त धातु और मल से मिलकर बना है। हम जो भोजन करते हैं, उसी से रस, रक्त, मांस, वसा, अस्थि, मज्जा, शुक्र और ओज का निर्माण होता है। यदि व्यक्ति 21 से 120 दिनों तक नियमित दिनचर्या अपनाए – सूर्योदय के एक घंटे बाद जल सेवन,दो घंटे बाद एल्कलाइन नाश्ता,दोपहर में तीव्र जठराग्नि के समय भोजन,शाम को स्वल्पाहार या केवल जल और दिन में केवल तीन बार भोजन करे, साथ ही ऑक्सीजन बढ़ाने वाले व्यायाम और आत्मचिंतन की साधना करे, तो वह ऊर्जा का निर्माण करते हुए पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक दायित्वों का संतुलित निर्वहन कर सकता है।

भोजन छोटी घटना नहीं..

ललित अग्रवाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मोबाइल को सही तरीके से चार्ज कर उसके फीचर्स समझने पड़ते हैं, या पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी मिट्टी तेल से नहीं चल सकती, वैसे ही मानव शरीर की मशीन को भी समझकर सही आहार देना आवश्यक है।

गलत भोजन से जठराग्नि कमजोर होती है, धातुएँ अपुष्ट होती हैं और त्रिदोष असंतुलित होकर रोगों को जन्म देता है। वहीं संतुलित भोजन से ऊर्जा बढ़ती है, मस्तिष्क तक शक्ति पहुँचती है और संकल्प शक्ति मजबूत होती है।

जैसा खाएंगे अन्न, वैसा होगा मन- यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है।

साधकों का सराहनीय सहयोग..

इस आयोजन को सफल बनाने में पूर्णिमा पिल्लै, संतोष वर्मा, प्रगति दुबे, भारती डडसेना, सरोजनी वर्मा, श्रुति साहू, रामसेवक कौशिक, महेंद्र जैन, संजय जैन, पार्थो मुखर्जी, सिकंदर रजक, उमाशंकर साहू, रेखा आहूजा, अखिला नंद पांडेय, नित्यानंद अग्रवाल, प्रमोद अवस्थी, राजेश शर्मा, गोपाल अग्रवाल, नरेश गेहानि, शरद मालोटिया, दौलतराम चौधरी, अजय जैन, प्रवीण गोलछा, रेवती राव, रामकुमार वस्त्रकार, आर.आर. साहू सहित अनेक साधकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

पिछले रविवार शनिमंदिर, राजकिशोर नगर, उसके बाद बी.आर. गार्डन, बृहस्पति बाजार में हुए आयोजनों के पश्चात यह साधना क्रम बिलासपुर में आगे भी जारी रहेगा।

अंत में उपस्थित सभी साधकों ने पूज्य परम आलय जी से आग्रह किया कि वे पुनः बिलासपुर पधारें और नए दृष्टिकोण वाले शिविर का आयोजन कर बिलासपुरवासियों को पुनः लाभान्वित करें।