बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव निरस्तीकरण पर मचा बवाल..प्रशासनिक मनमानी के आरोप, विजिलेंस जांच की मांग..कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और लोकायुक्त को सौंपा गया ज्ञापन..

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के 19 सितंबर 2025 को विधिसम्मत और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुए चुनाव को एकतरफा ढंग से निरस्त किए जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। चुनाव रद्द करने की कार्रवाई से प्रभावित आक्रोशित प्रेस क्लब के सदस्यों और निर्वाचित पदाधिकारियों ने इसे प्राकृतिक न्याय और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताते हुए सहायक पंजीयक एवं रजिस्ट्रार पर गंभीर मनमानी के आरोप लगाए हैं।

इस संबंध में प्रभावित पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपते हुए उनके माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव तथा लोकायुक्त से मामले में विजिलेंस अथवा उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव, फिर भी निरस्तीकरण..

ज्ञापन में बताया गया है कि 19 सितंबर 2025 को बिलासपुर प्रेस क्लब का चुनाव पूरी पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और सदस्यों की व्यापक भागीदारी के साथ शांतिपूर्वक संपन्न हुआ था। चुनाव के बाद निर्वाचित नई कार्यकारिणी ने विधिवत कार्यभार भी संभाल लिया था।

इसके बावजूद करीब दो माह बाद 18 नवंबर 2025 को फर्म एवं संस्थाएं रायपुर की रजिस्ट्रार पद्मिनी भोई द्वारा चुनाव को अचानक निरस्त कर दिया गया, जिससे प्रेस क्लब सदस्यों में भारी आक्रोश व्याप्त है। पत्रकारों का कहना है कि यह निर्णय लोकतांत्रिक जनादेश को कुचलने जैसा है।

सुनवाई से पहले फैसला, प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन..

ज्ञापन के अनुसार रजिस्ट्रार द्वारा 18 नवंबर को चुनाव निरस्त करने का आदेश पारित कर दिया गया, जबकि संबंधित पक्षों को चार दिन बाद 24 नवंबर को नोटिस जारी किया गया।अर्थात सुनवाई से पहले ही फैसला सुना दिया गया, जो कि प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है।

पत्रकारों ने जताई गहरी चिंता..

प्रभावित पत्रकारों का कहना है कि यदि प्रेस क्लब जैसी जागरूक और संगठित संस्था के साथ इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है, तो आम नागरिकों और छोटी समितियों की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

सहायक पंजीयक पर अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्रवाई के आरोप..

ज्ञापन में सहायक पंजीयक ज्ञान पी. साहू पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने अधिकार क्षेत्र से बाहर धारा 32(ख) का आवेदन स्वीकार किया।

एक-तिहाई सदस्यों के समर्थन और शपथ पत्र के बिना शिकायत पर कार्रवाई की।

कोरम विहीन आवेदन को वैध ठहराया।

बिना वैध इलेक्शन पिटीशन के चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।

नियम विरुद्ध तरीके से प्रकरण को रजिस्ट्रार को भेजा।

रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी उठे सवाल, आंदोलन की चेतावनी..

रजिस्ट्रार द्वारा केवल पत्राचार के आधार पर चुनाव निरस्त करने, शिकायत की सत्यता की जांच न करने, बिना साक्ष्य कठोर आदेश पारित करने और निर्वाचित कार्यकारिणी को हटाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया है कि यदि विजिलेंस या स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से शामिल..

ज्ञापन सौंपने वालों में दिलीप यादव (अध्यक्ष – 19 सितंबर 2025 चुनाव), इरशाद अली (पूर्व अध्यक्ष), संजीव पांडे, गोपी डे, लोकेश वाघमारे, रमेश राजपूत, कमलेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार महेश तिवारी, अखलाख खान, रवि शुक्ला, श्याम पाठक, जितेंद्र थवाईत, पंकज गुप्ते, मनीष शर्मा, जेपी अग्रवाल, दिब्येंदु सरकार, आलोक अग्रवाल,अमित संतवानी, अनुज श्रीवास्तव, उत्पल सेन गुप्ता, राकेश प्रताप सिंह, गोविंद शर्मा, सतीश मिश्रा, भुवनेश्वर बंजारे, विकास तिवारी, रोशन वैद्य, घनश्याम गंधर्व, सूर्यकांत, नरेन्द्र सिंह, प्रांशु क्षत्रिय, उदय सिंह, निशांत तिवारी सहित अनेक पत्रकार शामिल रहे।