

बिलासपुर । संत रविदास जयंती एवं माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर शनिमंदिर, राजकिशोर नगर में प्रवचन नहीं, प्रयोग की अवधारणा पर आधारित एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर सन टू ह्यूमन के संस्थापक परम पूज्य परमालय जी की 30 वर्षों की साधना और शोध पर आधारित मानव कल्याणकारी प्रयोगों का सामूहिक अभ्यास किया गया।
कार्यक्रम में परमालय जी के रहस्यमय मंदिर सेजवानी में 18 दिनों तक सपत्नीक साधना कर लौटे ललित अग्रवाल एवं निशा अग्रवाल सहित अनेक साधकों ने अपने अनुभव साझा किए। साधकों ने सेजवानी को धरती का स्वर्ग बताते हुए कहा कि वहां की साधना से शरीर, मन और चेतना के स्तर पर गहन सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होते हैं तथा स्वयं के भीतर विराजित परमात्मा से साक्षात्कार सहज हो जाता है।
ललित अग्रवाल ने बताया कि मानव शरीर से जुड़ी सूक्ष्म प्रक्रियाओं को समझकर किए गए छोटे-छोटे प्रयोग व्यक्ति को निरोगी बनाने के साथ आत्मिक विकास में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने बताया कि मुख में उत्पन्न लार को संग्रहित कर प्रार्थना भाव से ग्रहण करने से सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। बैलेंस में खड़े होकर तृतीय नेत्र जागरण, दाएं-बाएं घूमने जैसे प्रयोगों से मैग्नेटिक ऑरा सक्रिय होती है, ठीक उसी प्रकार जैसे सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के सकारात्मक व नकारात्मक ध्रुवों के संयोग से ऊर्जा उत्पन्न होती है।
कार्यक्रम में शक्तिशाली नाभि झटका प्रयोग के सात चरण श्वास प्रक्रिया, वाइब्रेशन, क्लैपिंग, थपथपाना, ताड़ासन, हड्ड आसन एवं उकडू आसन का अभ्यास कराया गया। नाद से अनाहत तक जागृत ऊर्जा को कॉस्मिक नटराज नृत्य के माध्यम से शरीर के प्रत्येक अंग तक प्रवाहित किया गया। इसके पश्चात प्रातः सूर्य एवं सायंकाल चंद्रमा की संध्या में धरती माता को सातों अंगों से प्रणाम कर कृतज्ञता प्रकट की गई।
इसके उपरांत ‘परम पूज्य भोजन है दिव्यम अनुपम, परम शक्ति रूपम, परम तृप्ति स्वरूपम’ की प्रार्थना के साथ अदृश्य एल्कलाइन नाश्ते का सेवन कराया गया। इसमें तिल, मेथी दाना, सौंफ, सूरजमुखी बीज, अलसी सहित विभिन्न प्राकृतिक बीजों को कच्चे रूप में ग्रहण कराया गया, जो त्रिदोष शमन के साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।

परमालय जी के 30 वर्षों के शोध पर आधारित इन प्रयोगों का अभ्यास आज शनिमंदिर, राजकिशोर नगर में बिलासपुर के 111 साधकों ने एकसाथ किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ललित अग्रवाल, संजय जैन, पूर्णिमा पिल्लै, निशा अग्रवाल, ऋतु जैन, सृष्टि राठौड़, चंचल जैन, लक्ष्मी साहू, सुशील धर दीवान, पार्थों मुखर्जी, सिकंदर रजक, सौमित्र धर, राकेश राठौर, नरेंद्र राठौर, अजय जैन, विनोद साहू, अलका राठौड़, अशोक गुप्ता, शैलेंद्र उपाध्याय सहित अनेक साधकों का सराहनीय योगदान रहा।
अंत में विभिन्न गार्डनों में नियमित रूप से प्रयोग करवाने वाले लीडरों ने आम नागरिकों से अपील की कि वे इन वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित प्रयोगों को अपने नजदीकी गार्डन में अपनाकर स्वयं को जानने और समझने की दिशा में कदम बढ़ाएं।




