महाराष्ट्र से 400 किमी उड़कर छत्तीसगढ़ पहुंचा बीमार गिद्ध, गरियाबंद के जंगल में मिला, अब रायपुर में होगा इलाज..

गरियाबंद/रायपुर। महाराष्ट्र के ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व से उड़ान भरने वाला एक सफेद पीठ वाला दुर्लभ गिद्ध (वाइट रम्पड वल्चर) भटकते हुए 400 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व पहुंच गया। मंगलवार सुबह यह गिद्ध गरियाबंद जिले के इन्दागांव बफर क्षेत्र की काण्डसर बीट में बीमार हालत में मिला। पेट्रोलिंग टीम के सदस्य राधेश्याम यादव ने जब गिद्ध को गर्दन झुकाए बेसुध देखा, तो तुरंत अधिकारियों को खबर दी। वन विभाग की टीम ने गिद्ध का सुरक्षित रेस्क्यू किया और अब उसे बेहतर इलाज के लिए रायपुर के जंगल सफारी भेजा गया है।

पीठ पर लगा था जीपीएस, हाईटेक तरीके से हो रही थी निगरानी..

रेस्क्यू के दौरान वन विभाग की टीम तब हैरान रह गई जब उन्होंने गिद्ध की पीठ पर माइक्रो ट्रांसमीटर और जीपीएस लगा देखा। इससे साफ पता चला कि इस दुर्लभ पक्षी की निगरानी महाराष्ट्र के वैज्ञानिक कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक गिद्ध ताडोबा से उड़कर यहां पहुंचा था, लेकिन शरीर में पानी की कमी (डी-हाइड्रेशन) या किसी बीमारी की वजह से वह उड़ने की हालत में नहीं था। बिलासपुर के विशेषज्ञ अभिजीत शर्मा ने फोन पर टीम को बताया कि गिद्ध को कैसे संभालना है, जिसके बाद उसे पानी और हल्का आहार दिया गया।

रायपुर की टीम पहुंची गरियाबंद, केज में किया शिफ्ट..

गिद्ध की हालत नाजुक देख वन मंत्री केदार कश्यप और पीसीसीएफ अरुण पाण्डेय के निर्देश पर जंगल सफारी रायपुर से डॉक्टरों की टीम बुलाई गई। डॉक्टर जडिया और उनकी टीम ने गरियाबंद पहुंचकर गिद्ध की जांच की और उसे खास रेस्क्यू केज में शिफ्ट किया। फील्ड डायरेक्टर सतोविशा समाजदार ने बताया कि गिद्ध को सुरक्षित जंगल सफारी ले जाया गया है, जहां उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा। पूरी तरह ठीक होने के बाद इसे वापस इसके प्राकृतिक घर में छोड़ दिया जाएगा।

उदंती की पहाड़ियों में पहले भी दिखे हैं गिद्ध..

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि रिजर्व का 70 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी है। ओढ़ और आमामोरा की पहाड़ियों में पहले भी गिद्धों के ठिकाने मिले हैं। हाल ही में ओडिशा से आए बीमार हाथियों के बाद अब महाराष्ट्र के इस गिद्ध का रेस्क्यू करना वन विभाग के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। इस पूरे ऑपरेशन में रेंजर सुशील कुमार सागर और बीट गार्ड रामकृष्ण साहू का भी बड़ा योगदान रहा।