

रायपुर, छत्तीसगढ़। सरकारी दफ्तरों में बैठकर मनमानी करने और ड्यूटी पर देर से आने वाले लापरवाह अफसरों और कर्मचारियों की अब खैर नहीं होगी। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने एक कड़ा फरमान जारी किया है, जिसके तहत मंत्रालय और संचालनालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य कर दी गई है। यह व्यवस्था 1 दिसंबर से शुरू हो रही है, जिसका सीधा मतलब है कि अब समय पर नहीं आने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी और उनकी मनमर्ज़ी खत्म हो जाएगी।
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अब तक अपनी मनमर्ज़ी से आने जाने वाले अधिकारियों पर अंकुश लगाने के लिए जीएडी ने यह कदम उठाया है। विभाग के जारी आदेश के मुताबिक, मंत्रालय में 1 दिसंबर 2025 से अवर सचिव और उनसे वरिष्ठ सभी अधिकारियों को दफ्तर में आने और जाने दोनों समय अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से सभी संचालनालयों के कर्मचारियों पर भी यह नियम सख्ती से लागू हो जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि इस नई व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही या नियमों का पालन न करने को गंभीरता से लिया जाएगा। पहले से ही 20 नवंबर से आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का ट्रायल रन चल रहा है, ताकि क्रियान्वयन निर्बाध हो सके।
अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी हाजिरी रोज़ाना दो बार दर्ज करानी होगी। एक बार दफ्तर में प्रवेश करते समय यानी ‘इन’ और दूसरी बार बाहर जाते समय यानी ‘आउट’ उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके लिए दो आसान विकल्प दिए गए हैं। पहला, कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप की मदद से चेहरा पहचान (फेसियल ऑथेंटिकेशन) के ज़रिए अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं। दूसरा, मंत्रालय भवनों के मुख्य प्रवेश द्वारों पर दीवार पर लगी अंगूठा आधारित बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गई हैं, जिसके माध्यम से भी हाजिरी लगाई जा सकती है। विभाग ने कहा कि कर्मचारी अपनी सुविधा के हिसाब से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन उपस्थिति दर्ज कराना अब अनिवार्य होगा।




