

बिलासपुर, 29 जुलाई । बिलासपुर जिले के ग्राम मोहतरा में ग्रामसभा के दौरान भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने पर वकालत के छात्र रंजेश सिंह पर जानलेवा हमला किया गया और बाद में उन्हीं के खिलाफ झूठे आरोपों में एफआईआर दर्ज कर दी गई। रंजेश ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रंजेश सिंह का आरोप है कि वे सोमवार को ग्रामसभा में अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने बीते 10–15 वर्षों में पंचायत में हुए भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक किया। उनके अनुसार, पंचायत के अधिकतर कार्यों का भुगतान एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्शाया गया है, जिसकी कोई दुकान भी नहीं है। उदाहरण के तौर पर, बिना दुकान और बिल के 49 हजार रुपये में 2000 लीटर की पानी टंकी खरीदी दिखा दी गई।
इतना ही नहीं, सामूहिक शौचालय निर्माण के नाम पर लगभग 8 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में केवल 3.5 लाख रुपये की लागत से शौचालय का निर्माण मनरेगा मद से हुआ है।
इन खुलासों के बाद ग्राम के ही पूर्व सरपंच एवं वर्तमान उपसरपंच इंद्रजीत क्षत्रिय, जो भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष भी हैं, भड़क उठे और ग्रामसभा के समाप्त होते ही रंजेश सिंह पर उनके कार्यालय में हमला कर दिया। रंजेश की मां, जो स्वयं ग्राम पंचायत सदस्य हैं, ने बीच-बचाव कर उनकी जान बचाई।
रंजेश के अनुसार, वे हमले के तुरंत बाद थाने पहुंचे, लेकिन तीन घंटे तक उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। थाने से बाहर निकलते ही पुनः 80–100 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला किया, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
हैरानी की बात यह रही कि अगले ही दिन रंजेश को पता चला कि उन्हीं के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी गई है, जिसमें SC / ST एक्ट जैसी धाराएं भी शामिल हैं। रंजेश का आरोप है कि यह सब कुछ राजनीतिक दबाव और साजिश के तहत किया गया, ताकि उन्हें डराया जा सके और पंचायत में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डाला जा सके।

रंजेश सिंह ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते न्याय नहीं मिला, तो न केवल उनका भविष्य, बल्कि पूरे क्षेत्र में न्याय और पारदर्शिता की उम्मीदें भी खतरे में पड़ जाएंगी।



